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हाथरस बलात्कार कांड में आरोपी के एक पत्र से आया “हॉनर किलिंग” का एंगल?

हाथरस सामूहिक बलात्कार कांड में एक ऐसा मोड़ आया है जो तथाकथित रूप से इसे “बलात्कार”  कहने से रोक रहा है.

दरअसल, अब तक की कहानी कुछ ऐसी समझी और मानी जा रही थी कि 19 वर्षीय युवती का सामूहिक बलात्कार किया गया है और उसे बेहद वीभत्स तरीके से मारा पीटा गया है. यही पीड़िता का मरने के पहले का बयान भी था.

लेकिन अब इस केस के मुख्य आरोपी ने इस केस में एक पत्र लिखकर नया मोड़ देने का प्रयास किया है. मुख्य आरोपी संदीप उर्फ चंदू ने अलीगढ़ जेल से हाथरस के एसपी को चिट्ठी लिखी है. इस पत्र में उसने यह कहा है कि वो और तथाकथित पीड़ित युवती दोस्त थे और अक्सर मिलते जुलते थे. यह दोस्ती पीड़ित के परिवार वालों को पसंद नहीं थी. यही कारण है कि पीड़ित युवती को परिवार के ही सदस्यों ने मार डाला है.

चिट्ठी में  कहा गया है कि उसपर लगाये गए आरोप झूठे हैं… पत्र में लिखा गया है कि…

वह मेरे गांव की ही लड़की थी, जिससे मेरी दोस्ती थी. मुलाकात के साथ-साथ, मेरी और उसकी कभी-कभी फोन पर बात हो जाती थी. हमारी दोस्ती उसके घरवालों को पसंद नहीं थी. घटना के दिन मेरी उससे खेत में मुलाकात हुई. उसके साथ उसकी मां, भाई थे. उसके कहने पर मैं तुरंत घर चला गया

बाद में पता चला कि विक्टिम के भाई और मां ने उसे बहुत मारा है. दोनों की दोस्ती को लेकर. इस मारपीट में उसे गंभीर चोट आई और बाद में उसकी मौत हो गई. मैंने कभी भी विक्टिम के साथ मारपीट नहीं की, न ही उसके साथ कोई गलत काम किया. उसने बताया कि विक्टिम की मां और भाई ने उसे झूठे आरोप में  फंसाकर जेल भेजा है. अन्य आरोपियों पर भी झूठा इल्ज़ाम लगाया गया है.

इस मुद्दे पर सम्बंधित जाति के  लोगों द्वारा पहले ही विरोध प्रदर्शन किया गया है. आरोपियों के परिजनों ने भी अपने बेटों को निर्दोष बताया है.

इस केस को “हॉरर किलिंग” का रूप देने के एंगल पर भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद पहले ही आशंका जाता चुके थे. क्या यह सही होता दिख रहा है? सच्चाई सारा देश जानना चाहता है.

वैसे यह भी उल्लेखनीय है कि न्यायलय ने भी पुलिस प्रशासन द्वारा बरती गई लापरवाहियों पर स्वतः संज्ञान ले कर इस केस से सम्बंधित उत्तरप्रदेश के आला अधिकारीयों को अगली 12 अक्टूबर की सुनवाई में हाज़िर रहने का आदेश दिया है.

 इस मामले की जांच एसआईटी कर रही है. एसआईटी के रिपोर्ट सौंपने का समय पहले 7 अक्टूबर तय किया गया था लेकिन अब एसआईटी को 10 दिनों का अतरिक्त समय और दिया गया है.

योगी आदित्यनाथ ने इस केस की जांच सीबीआई से जांच कराने की सिफ़ारिश की है.   

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