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संविधान के अनुच्छेद 254-2 से क्या केंद्र सरकार द्वारा लाए गये कृषि अधिनियम को पलटा जा सकता है?

दिल्ली। राज्य सरकारों को सोनिया गांधी की सलाह, संविधान के अनुच्छेद 254-2 के तहत क़ानून पारित करने के संदर्भ में गौर करें। प्रदेश सरकार केंद्र सरकार के कृषि क़ानून को निष्प्रभावी करने के लिए अपने यहां क़ानून लाने की संभावना पर विचार करें। यह बात कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी पार्टी के शासन वाले राज्यों की सरकारों से कही।

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने इस ख़बर को प्रमुखता से छापा है। हाल में संपन्न हुए संसद के मानसून सत्र में कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को संसद के दोनों सदनों ने मंज़ूरी दी है।

संसद से पारित इन विधेयकों पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को मुहर लगा दी है जिसके बाद अब ये क़ानून बन गए हैं। हालांकि संसद में पेश किए जाने से लेकर अब तक इनके विरोध में पंजाब, हरियाणा समेत देश के कई अन्य हिस्सों में किसान लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन अब उग्र भी होते जा रहे हैं।

संविधान के अनुच्छेद 254-2 पर क्या कहते हैं कांग्रेस के नेता

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि “अनुच्छेद 254-2 के तहत नियम एक राज्य विधायिका को ‘संसद कानून के लिए कानून’ लागू करने की अनुमति देते हैं और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्यों को पिछले यूपीए शासन द्वारा पारित भूमि अधिग्रहण कानून को दरकिनार करने के लिए इसका इस्तेमाल करने की सलाह दी थी।”

“पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली ने राज्यों को 2013 भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों को खत्म करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 254-2 का सहारा लेने के लिए कहा था। ऐसा कानून जिसका उन्होंने राज्यसभा सांसद के रूप में पूरी तरह से समर्थन किया है।

राज्यों को अब उन विधेयकों का पालन करना चाहिए जो कृषि बिलों के कारण हुए नुकसान को पूर्ववत करते हैं।”

जयराम रमेश ने एक ट्वीट के ज़रिये उपरोक्त कानून का उल्लेख करते हुए कही।

संसद में इन विधेयकों को पारित करने के तरीके को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष लगातार आलोचनात्मक रुख अपनाए हुए है। उन्होंने आरोप लगाया है कि संसदीय मानदंडों की पूर्ण अवहेलना करते हुए, असंवैधानिक ढंग से इन विधेयकों को मंजूरी दी गई थी। कांग्रस ने इस मसले को कोर्ट में चुनौती देने का प्रस्ताव भी रखा है।

ये भी पढ़ें – तमाम विरोधों और आंदोलन के बीच राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने दी तीन कृषि विधेयकों को मंज़ूरी

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