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जामिया मिलिया कैंपस में पुलिस के बर्बर लाठी चार्ज के एक साल बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं

दिल्ली। जामिया मिलिया इस्लामिया कैंपस में पुलिस हमले और बर्बर लाठी चार्ज के एक साल बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उस लाठी चार्ज में एक छात्र की आँखों की रौशनी चली गई, 100 लोग घायल हो गये थे। इस घटना के बाद इस मामले में यूनिवर्सिटी द्वारा पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी।

न्याय की उम्मीद में बैठी यूनिवर्सिटी की उप-कुलपति नज़्मा अख्तर निराश नज़र आती हैं। उनका कहना है कि उन्हें अब कोई उम्मीद नहीं है, इसके बजाए उन्होंने भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।

ठीक एक साल पहले जामिया मिलिया के छात्र-छात्राओं ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में प्रदर्शन किया था। 15 दिसंबर 2019 को वे इस कानून के विरोध में शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे, उन्हें मथुरा रोड के पास दिल्ली पुलिस ने अचानक रोक लिया।

यूनिवर्सिटी छात्रों पर पुलिस की हिंसक कार्रवाई शुरू होते ही पथराव शुरू हो गया। शिकायत के विपरीत पुलिस का कहना है कि वे पथराव कर रहे बाहरी लोगों को पकड़ने की कोशिश कर रहे थे, जो कैंपस में घुस आए थे।

जामिया मिलिया के सौ से अधिक स्टूडेंट हुए थे घायल

सौ से अधिक स्टूडेंट्स पुलिस और अर्धसैनिक बलों की बर्बर कार्रवाई में बुरी तरह से घायल हो गए थे, जिसमें से एक छात्र की एक आंख को रोशनी चली गई थी। बाद में यूनिवर्सिटी ने एक रिपोर्ट तैयार की, जिसमें पुलिस के यूनिवर्सिटी की नई और पुरानी दोनों लाइब्रेरी में घुसने का उल्लेख था। लाइब्रेरी में पढ़ रहे छात्रों पर पुलिस के हमले की तस्वीरें, वीडियो और सीसीटीवी फुटेज बतौर साक्ष्य पेश किया गया। इसे बावजूद पुलिस ने इन आरोपो को लगातार खारिज किया है। इस हमले के तीन महीने बाद मरम्मत होने पर लाइब्रेरी को दोबारा खोला गया।

यूनिवर्सिटी ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय (अब शिक्षा मंत्रालय) को 2.66 करोड़ रुपये का बिल भेजा था। लाइब्रेरी की संपत्ति को पुलिस हमले में पहुंचे नुकसान की भरपायी के लिये था। इस मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय और न्यायिक समिति के गठन की मांग भी की गई थी। हालांकि इस मोर्चे पर भी कोई संबंधित व्यक्ति उदासीन हैं, क्योंकि इस संदर्भ में भी कोई प्रगति नहीं हुई है। पुलिसकर्मियों की बर्बर कार्रवाई का मामला फिलहाल अदालत में ज़रूर है, लेकिन इस घटना की शिकायत को अब तक एफआईआआर के रूप में दर्ज नहीं की गई है।

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