Homeमजबूर भारतहरिद्वार कुंभ: आस्था के महापर्व पर छाई है कोरोना की काली छाया

हरिद्वार कुंभ: आस्था के महापर्व पर छाई है कोरोना की काली छाया

गुरुवार को आरंभ हुए हरिद्वार कुंभ में कोरोना इफेक्ट नज़र आया है। यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बहुत कम रही। सिर्फ कुंभ क्षेत्र ही नहीं बल्कि हरिद्वार में भी इसका असर देखने को मिला है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथसिंह रावत ने पहले कहा था कि कुंभ स्नान के लिये आने वालों को कोरोना निगेटिव सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं होगी, लेकिन वे खुद संक्रमित हो गये। हालांकि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने इस आदेश को पलट दिया और हरिद्वार आने वाले कोविड निगेटिव सर्टिफिकेट अनिवार्य कर दिया। हाईकोर्ट ने वैक्सीन लगवाने वालों को इससे छूट दी है।

दिशानिर्दशों के अनुसार हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं की शहर की हर सीमा में गहन जाँच की जा रही है। सारी कवायद संक्रमित व्यक्ति को मेला क्षेत्र व हरिद्वार शहर में प्रवेश करने से रोकने के लिये है। ख़ासकर कोरोना संक्रमण से सबसे ज़्यादा प्रभावित 12 राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को कोविड-19 की निगेटिव रिपोर्ट का प्रमाणपत्र दिखाना अनिवार्य किया गया है।

दिशानिर्देशों का पालन करते हुए हरिद्वार कुंभ का आयोजन एक चुनौती

कोरोना संक्रमण के डर के कारण वैसे ही यहाँ लोग कम आ रहे हैं। दूसरी तरफ अनेक राज्यों से लॉकडाउन की खबरें भी आ रही हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा दिये गये निर्देशानुसार, दुर्ग जिला कलेक्टर ने 6 अप्रेल से दुर्ग में लॉकडाउन का निर्णय लिया है। कुंभ के मामले में अपर मेला अधिकारी रामजी शरण शर्मा का कहना है कि कोविड के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए कुंभ का आयोजन एक चुनौती है। उनकी कोशिश है कि स्थानीय जनता और बाहर से आए श्रद्धालुओं के सहयोग से मेला सकुशन संपन्न हो जाए।

प्रशासन ने जगह-जगह मास्क लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील संबंधी पोस्टर लगाकर रखा हुआ है। फिर भी इसका पालन करते कम ही लोग दिखे। शासन चाहे जितना भी जागरूक करने की कोशिश करे, आम जनता के सहयोग के बिना दिशानिर्देशों के अनुरूप कार्य करना मुश्किल है। स्नान स्थल पर भले ही सोशल डिस्टेंसिंग की अपील की जाए लेकिन भीड़-भाड़ में संभव नहीं हो पाता। इस बार भले श्रद्धालुओं की संख्या कम हो मगर फिर भी भीड़ इतनी तो है कि दिशानिर्देशों पालन करना मुश्किल हो जाए। हालांकि चुनाव प्रचार और राजनेताओं की जनसभाओं में भीड़ को देखकर शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी लोग सवाल उठाते हैं।

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