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2015 चुनाव में प्रधानमंत्री द्वारा घोषित सवा लाख करोड़ का पैकेज निकला फ़र्ज़ी; कागजों में भी पूरा नहीं हुआ काम

  • स्वच्छ सर्वेक्षण 2020 में गंदगी के कारण शीर्ष पर रहने वाला ‘स्मार्ट सिटी’ भागलपुर कब बदलेगा?
  • ‘बोल बिहारी’ 11 सूत्रीय एजेंडे को लेकर भागलपुर में उठा किसान-जवान, पर्यावरण और उद्योग का सवाल
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‘रेशमनगरी’ कही जाने वाला भागलपुर आज अपनी पहचान खो रहा है। युवा हल्ला बोल के राष्ट्रीय परिषद सदस्य अजित यादव ने ‘बोल बिहारी’ मुहिम के जरिए भागलपुर सुल्तानगंज में श्रावणी मेला कॉरिडोर और ‘शिवा सर्किट’ की माँग उठाई। पर्यटन उद्योग के असीम संभावनाओं के बावजूद सरकारी उदासीनता से बदहाल है भागलपुर।

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5 साल पहले प्रधानमंत्री ने आरा के मंच से सवा लाख करोड़ के पैकेज का उत्तेजित ऐलान किया था। राजमार्ग, ग्रामीण सड़क और कृषि सहित इस पैकेज का एक अहम भाग केंद्रीय विश्वविद्यायल और स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी पे खर्च होना था। इसके अंतर्गत भागलपुर के विक्रमशिला में केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने की बात कहीं गई थी और 1550 करोड़ की लागत से एक मेगा स्किल विश्वविद्यायल बनना था जिसमे की एक लाख युवाओं को प्रशिक्षण देने की बात कही गई थी। 5 साल बाद ना तो केंद्रीय विश्वविद्यालय का कोई अतापता है और ना ही मेगा स्किल विश्वविद्यायल का। सरकार के पास इसका भी कोई रिकॉर्ड नहीं की इस पैकेज से भागलपुर में कितनी सड़के अथवा अस्पताल, राजमार्ग बने और कृषि के क्षेत्र में कितना पैसा खर्च किया गए। राष्ट्रीय संयोजक अनुपम ने इसपर सवाल होते उठाते हुए कहा, “प्रधानमंत्री के अन्य पैकेज और वादों की तरह ये भी एक जुमला साबित हुआ जो सिर्फ चुनाव जीतने के लिए किया गया था। बिहारी भावनाओं के साथ खेलने वाले इन वादों को बिहार भुला नहीं सकता है। वो सवा लाख करोड़ प्रधानमंत्री अपनी जेब से नहीं दे रहे थे, वो पैसा बिहारियों का पैसा है।” राष्ट्रीय परिषद के सदस्य गोविंद मिश्र ने ‘मॉडल एग्जाम कोड’ के तहत सभी रिक्त पदों को भरने की माँग उठाई। हाई कोर्ट अधिवक्ता और राष्ट्रीय परिषद के सदस्य अतुल झा ने शिक्षा, शिक्षक और शिक्षा गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की माँग उठाई। साथ ही उच्च शिक्षा बढाने पर भी ज़ोर दिया।

स्मार्ट सिटी के नाम पर जो जनता को बेवकूफ बनाया जा रहा है उसपर ऋषव रंजन का कहना है कि अगर भागलपुर का चुनाव यहाँ के गंदगी को साफ करने पर नहीं होता है तो इससे बड़ी शर्मिंदगी बिहार के लिए और कुछ नहीं हो सकती।

प्रेस वार्ता में युवा हल्ला बोल के 11 सूत्रीय एजेंडा वृस्तित रूप से बताया गया। 19 तारीख को ‘बोल बिहारी’ मुहिम अकबरपुर, माँझो गाँव, सहाकुन प्रखंड और रेशम कारोबारीयों के इलाकों से गुजरते हुए अन्य इलाकों तक पहुँचा।

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