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इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली पत्रकार प्रशांत कन्नौजिया को जमानत

दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट से उत्तर प्रदेश के पत्रकार प्रशांत कन्नौजिया को जमानत मिल गई है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें कथित आपत्तिजनक ट्वीट के लिए 18 अगस्त को दिल्ली में उनके घर से गिरफ़्तार किया था।

लखनऊ सत्र न्यायालय में प्रशांत कन्नौजिया को जमानत नहीं मिली थी

पिछले महीने यूपी सरकार ने हाईकोर्ट में दायर उनकी ज़मानत याचिका पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा था। इसकी वजह से प्रशांत कन्नौजिया को एक और महीना जेल में रहना पड़ा।

लखनऊ की सत्र अदालत से प्रशांत कन्नौजिया को ज़मानत नहीं मिली थी। वहाँ जमानत याचिका खारिज़ होने के बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हाई कोर्ट के फैसले के बाद प्रशांत की पत्नी जगीशा अरोड़ा ने मीडिया पर इसकी जानकारी दी और उनका साथ देने वालों के प्रति आभार व्यक्त किया।

नौ धाराएँ के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी

17 अगस्त को हजरतगंज थाने के एक पुलिसकर्मी ने प्रशांत के खिलाफ़ एफआईआर दर्ज करवाई थी। एफआईआर में कहा गया था, ‘प्रशांत कनौजिया द्वारा छेड़छाड़ की गई तस्वीर से सुशील तिवारी को बदनाम करने की कोशिश की गई है। प्रशांत ने लिखा था कि यह तिवारी का निर्देश है कि अयोध्या के राम मंदिर में शूद्र, ओबीसी, अनुसूचित जाति और जनजाति का प्रवेश निषेध होना चाहिए और सभी लोग इसके लिए आवाज उठाएँ।’

आगे कहा गया था, ‘इसे सुशील तिवारी की पोस्ट के स्क्रीनशॉट के बतौर शेयर किया जा रहा था। सोशल मीडिया पर साझा हुई पोस्ट्स का स्क्रीनशॉट संलग्न है। इस प्रकार की आपत्तिजनक पोस्ट विभिन्न समुदायों में वैमनस्य फैलाने वाली, सामाजिक सौहार्द पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली है जिससे लोक प्रशांति भंग हो सकती है।’

इसमें आईपीसी की नौ धाराओं का जिक्र किया गया है, जिनमें 153 ए/बी (धर्म, भाषा, नस्ल वगैरह के आधार पर समूहों में नफरत फैलाने की कोशिश), 420 (धोखाधड़ी), 465 (धोखाधड़ी की सजा), 468 (बेईमानी के इरादे से धोखाधड़ी), 469 (प्रतिष्ठा धूमिल करने के उद्देश्य से धोखाधड़ी) 500 (मानहानि का दंड) 500 (1) (बी) 505(2) शामिल हैं।

प्रशांत इससे पहले 2019 में भी गिरफ्तार हो चुके हैं

इसके अलावा कंप्यूटर संबंधी मामलों के लिए उन पर आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत भी मामला दर्ज किया गया था। इससे पहले साल 2019 में भी प्रशांत कनौजिया को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की एक सोशल मीडिया पोस्ट के लिए यूपी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। तब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशांत को रिहा किया गया था, उस समय भी उनके खिलाफ हजरतगंज थाने में मामला दर्ज हुआ था।

पुलिस का आरोप था कि प्रशांत ने मुख्यमंत्री पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उनकी छवि ख़राब करने की कोशिश की थी। प्रशांत कनौजिया साल 2016 से 2018 तक बतौर रिपोर्टर द वायर हिंदी की टीम का हिस्सा रहे हैं।

यह भी पढ़ें – ‘जिस तरह की किताबें मैं लिखता हूँ उसमें जेल तो हो सकती है लेकिन अवार्ड नहीं मिल सकते।’

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