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हाथरस बलात्कार हादसे की पीड़िता के शव का परिवारजनों के बिना किया गया अन्तिम संस्कार

नई दिल्ली: 14 सितम्बर के रोज 20 वर्षीय महिला का ऊँची जाति के चार लोगों द्वारा बलात्कार किया गया और बुरी तरह से मारा-पीटा गया. 14 दिनों तक महिला मौत से जूझती रही और अंत में हार गई. उत्तर प्रदेश के हाथरस की इस 20 वर्षीय महिला का भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच, परिवार के सदस्यों की गैर मौजूदगी में दाह संस्कार कर दिया गया है.

अन्तिम संस्कार के समय परिवार की गैर मौजूदगी पर हाथरस जिले के बूल गढ़ी गांव में तैनात पुलिस ने बताया कि कानून और व्यवस्था की स्थिति को सुचारू बनाये रखने के लिए ऐसा किया जाना ज़रूरी हो गया था. जबकि परिवारजनों का कहना था कि हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार केवल दिन में सूरज उगने के बाद ही किया जाता है लेकिन पुलिस ने यह संस्कार रात में ही 2 के लगभग कर दिया.

हालांकि, पुलिस को  डर था कि दिन निकलने पर मामला और बढ़ जाएगा और इसका राजनीतिकरण किया जाने लगेगा जिससे कानून व्यवस्था में समस्या हो सकती है.

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया कि सुबह 5 बजे से पहले अंतिम संस्कार करना चाहते हैं, उसके बाद एक्टीविस्ट और विभिन्न राजनीतिक दलों के लोग इस क्षेत्र को जाम कर देंगे.

मंगलवार के दिन सुबह 6:55 बजे सफदरजंग अस्पताल में पीड़िता की मौत हो गई थी. शव को रात 1 बजे के बाद गांव लाया गया. हाथरस के डीएम प्रवीण लश्कर जानकारी दी कि चंद्रशेखर आज़ाद की पार्टी भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के चलते शव को गांव लाने में बहुत देर हो गई.

शव जब गाँव पहुंचा तो परिजनों में रोष फ़ैल गया और गाँव में माहौल बिगड़ने लगा.

मृत महिला के घर पर लगभग 120 परिजन और रिश्तेदार शव लाये जाने का इंतजार कर रहे थे. ज्वाइंट मजिस्ट्रेट और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, चंदपा पुलिस थाने के पुलिसकर्मी और अपराध शाखा के पुलिस कर्मियों ने महिला के शव को घर ना लाकर सीधे श्मशान घाट पहुंचाने का प्रयास किया.

इसका विरोध करते हुए पीड़िता के बड़े भाई, बड़ी बहन और भाभी ने एम्बुलेंस का रास्ता रोक लिया. ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने सबको शांत करने का प्रयास किया और एम्बुलेंस को घर पर ले जाया गया. परिवारजनों को अंतिम क्रिया (रिचुअल्स) करने के लिए मात्र 20 मिनट का ही समय दिया गया.

गांव में 150 से अधिक पुलिस कर्मियों की एक मानव श्रृंखला बना कर और प्रदर्शन कर रहे लोगों को एंबुलेंस के सामने से हटाने के लिए हल्के बल का प्रयोग तक किया गया. घंटों तक झगड़े और प्रदर्शनहोते रहे. फिर शव को 2.25 बजे शव को परिवारजनों के बिना ही जला दिया गया. हालांकि 2.16 बजे हाथरस पुलिस ने एक ट्वीट कर कहा था कि ‘दाह संस्कार परिवार की इच्छा के अनुसार’ किया जाएगा.

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