Homeमजबूर भारतकश्मीर टाइम्स के श्रीनगर स्थित दफ्तर में अधिकारियों ने जड़ा ताला

कश्मीर टाइम्स के श्रीनगर स्थित दफ्तर में अधिकारियों ने जड़ा ताला

श्रीनगर। कश्मीर टाइम्स अखबार के दफ्तर को जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में अधिकारियों ने सोमवार को सील कर दिया है। दैनिक समाचार पत्र का कार्यालय यहां एक सरकारी इमारत में आवंटित किया गया था। अखबार की मालकिन अनुराधा भसीन ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। कश्मीर टाइम्स का दफ्तर श्रीनगर के प्रेस एन्क्लेव में संचालित हो रहा था, जिसे संपदा विभाग ने सील कर दिया।

अधिकारियों ने सरकार की कार्रवाई का कोई कारण नहीं बताया। इस अंग्रेजी अखबार का मुख्यालय जम्मू में है और यह केंद्र शासित प्रदेश के दोनों क्षेत्रों से प्रकाशित होता है।

‘श्रीनगर में हमारे दफ्तर पर कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना ताला डाल दिया गया है। आवंटन रद्द करने या खाली करने का कोई नोटिस हमें नहीं दिया गया था।’ – अनुराधा भसीन

कश्मीर टाइम्स का प्रकाशन 1954 में आरंभ हुआ था, तब इसका प्रकाशन साप्ताहिक होता था। 1964 से इस प्रकाशन रोज़ाना हो रहा है।

कश्मीर टाइम्स की मालकिन का घर भी खाली करा लिया गया था

अनुराधा भसीन के अनुसार, उन्होने संपदा विभाग में संपर्क किया और उनसे कार्यालय खाली करने के संबंध में आदेश देने को कहा। लेकिन संपदा विभाग ने यह आदेश जारी नहीं किया। इसके बाद अनुराधा भसीन ने अदालत का रुख किया लेकिन वहाँ से भी कोई आदेश नहीं आया।

भसीन ने इस कदम को अपने खिलाफ  ‘प्रतिशोध’ बताया, क्योंकि वह सरकार के खिलाफ बोलीं थी। उन्होंने पिछले साल अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में मीडिया पर लगाई गईं पाबंदियों के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।

‘पिछले साल जिस दिन मैं न्यायालय गई थी, उसी दिन कश्मीर टाइम्स को मिलने वाले राज्य सरकार के विज्ञापनों को रोक दिया गया था।’ – अनुराधा भसीन

अनुराधा भसीन ने पिछले साल केंद्र सरकार द्वारा जम्मू और कश्मीर में मीडिया पर लगाई गई पाबंदियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर फैसला देते हुए अदालत ने सरकार को सभी प्रतिबंधों की समीक्षा करने का आदेश दिया था। इससे पहले कश्मीर टाइम्स की मालकिन अनुराधा भसीन जमवाल का जम्मू स्थित घर भी खाली करा लिया गया था।

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी ट्वीट कर कहा, “अनुराधा भसीन के दफ्तर को बंद करना बीजेपी की प्रतिशोध की राजनीति दिखाता है।”

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