Homeहलचलराफेल विमान सौदा घोटाला: फ्रांसीसी एजेंसी AFA की जांच से नया खुलासा

राफेल विमान सौदा घोटाला: फ्रांसीसी एजेंसी AFA की जांच से नया खुलासा

राफेल विमान सौदा घोटाले को लेकर फिर से चर्चा में है। फ्रांस के प्रकाशन मीडियापार्ट के अनुसार भारत में एक बिचौलिये को बतौर उपहार 10 लाख यूरो दिए गए हैं। राफेल विमान सौदा अनिल अंबानी वाली रिलायंस को पार्टनर बनाए जाने को लेकर भी चर्चा में रहा है, इस मुद्दे पर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर रहा है। राहुल गांधी भी राफेल खरीद में घोटाले को लेकर सदैव मुखर रहे हैं। अब राफेल की निर्माता फ्रांसीसी कंपनी दसॉ ने 10 लाख यूरो बिचौलिये को देने की स्वीकारोक्ति के बाद फिर से बवाल मचना शुरू हो गया है। इस खुलासे के बाद राफेल विमान सौदे में घोटाले का अनुमान सच की तरफ बढ़ता दिख रहा है।

राफेल विमान सौदा दोबारा चर्चा में क्यों

मीडियापार्ट में छपी खबर के मुताबिक फ्रांस की एंटी करप्शन एजेंसी AFA ने दसॉ के खातों का ऑडिट किया। तब यह खुलासा हुआ कि दसॉ ने बतौर ‘गिफ्ट टू क्लाइंट्स’ भारत में बिचौलिये को दिया था। हालांकि दसॉ ने सफाई दी कि यह रकम राफेल लड़ाकू विमान के 50 बड़े ‘मॉडल’ बनाने में इस्तेमाल किया गया था। दसॉ से आए बयान के विपरीत सच्चाई ये है कि ऐसे कोई मॉडल बनाए ही नए गए। इस खुलासे के बाद भी एजेंसी ने कोई एक्शन नहीं लिया, मीडियापार्ट की खबर के मुताबिक फ्रांस की एंटी करप्शन एजेंसी AFA ने मामले को प्रोसिक्यूशन को नहीं सौंपा।

दसॉ ने ये ज़रूर कहा कि 20 हज़ार से अधिक यूरो वाले 50 मॉडल के लिये कुल राशि का आधा उन्होंने मिडिलमैन यानि बिचौलिये को दिया था। दसॉ ने ये नहीं बताया कि यह उपहार राशि किसे दी थी। रिपोर्ट के मुताबिक जिस भारतीय कंपनी का नाम इस घोटाले में आ रहा है, उसका मालिक अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले के केस में जेल जा चुका है। फ्रेंच मीडिया पब्लिकेशन ‘मीडियापार्ट’ के रिपोर्टर यान फिलिपन के अनुसार भारत-फ्रांस के बीच राफेल डील की जांच तीन हिस्सों में की जा रही है। अभी जिसकी रिपोर्ट बाहर आई है यह इस जांच का पहला ही हिस्सा है। राफेल के सौदे का सबसे बड़ा खुलासा तीसरे हिस्से में किया जाएगा।

रिलायंस को ऑफसेट पार्टनर बनाने पर भी हुआ था विवाद

साल 2016 में भारत और फ्रांस के बीच 36 राफेल लड़ाकू विमान का सौदा हुआ था। इनमें से एक दर्जन विमान भारत को मिल भी गए हैं और 2022 तक सभी विमान मिल जाएँगे। इस सौदे में दसॉ ने अनिल अंबानी की रिलायंस को ऑफसेट पार्टनर बनाया था। इस मामले में कांग्रेस का आरोप था कि अनिल अंबानी को फायदा पहुँचाने के लिये उनकी नई नवेली कंपनी को साझेदार बनाया गया था। गौरतलब है कि तब अनिल अंबानी की रिलायंस ग्रुप पर 1 लाख करोड़ से ज्‍यादा का कर्ज़ था।

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