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अभी भी राम के भरोसे आपदाग्रस्त क्षेत्र चमोली के लोग, 33 दिन चल सकता है बचाव कार्य

बीते दिनों चमोली जाना हुआ. चमोली वो जगह जहाँ आपदा आयी. यहाँ जाकर जब हमने जानना और देखना चाहा तो कई चीजे सामने आयी. पहाड़, पहाड़ों के बीच बहती नदी, मायूस चेहरे, बड़ी बड़ी मशीने, हेलीकाप्टर के आवाज़ों की गूंज.

आपदा के दौरान की कई विडिओ वायरल हुई. जो निति घाटी स्थित डैम और रैणी गाँव की हैं. इस दौरान के दौरान हम इन दोनों जगह गए. लोगों से बात की और पूरी घटना को समझने की कोशिश की.

जिस टनल में रेस्क्यू ऑपरेशन हो रहा था, उसमें लोग है ही नहीं

आपदा के बाद घटना स्थल पर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस आदि के मौजुदगी में राहत कार्य शुरू किया गया. निति घाटी में जो डैम तबाह हो गया, उसी के पास करीब 12 किलोमीटर की प्रस्तावित टनल में कार्य हो रहा था. सरकार ने पहले दिन ही मिडिया वालो को बताया की मुख्य द्वार से करीब 200 मीटर तक लोगों के फसें होने की संभावना है. यह भी बताया गया था की उस टनल में करीब 215 से ज्यादा लोग फसें हैं. लेकिन अब सरकार कोपता चला की जिस टनल में गत 5 दिनों से राहत कार्य चल रहा था उस टनल में कोई नहीं है. बल्कि अब उसके बगल स्थित टनल में लोगो के होने की आशंका बताई जा रही है. यह सरकार की बड़ी विफलता बताई जा रही है. हालाँकि अभी भी समाचार में बताया जा रहा की ‘जलस्तर बढ़ने से कार्य रोका गया’.

10 मीटर के राहत कार्य में लगते हैं 4 घंटे

हमने आपदाग्रस्त क्षेत्र में एनडीआरएफ की टीम से भी बात की. इस दौरान उन्होंने कई अहम बाते बताई. उनके द्वारा बताया गया की लगभग 200 मीटर तक लोगों के फसें होने की आशंका है. उनके द्वारा हमे यह भी जानकारी दी गयी की 4 घंटे में सिर्फ 10 मीटर तक ही राहत कार्य हो सकता है. देखा जाए तो इस हिसाब से 200 मीटर तक राहत कार्य करने में करीब 33 दिन लग सकते हैं. जो की सरकार की कार्य प्रणाली पर एक और सवाल खड़ा करता है.

कण्ट्रोल रूम नहीं, राशन और रहने के लिए लोग उपरवाले के भरोसे

रैणी गाँव में उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष ने जब चमोली के डीएम से स्थानीय लोगों व पीड़ितों के लिए राशन व रहने के व्यवस्था की बात कही तब जिलाधिकारी ने प्रीतम सिंह को जवाब दिया ‘सर आप फ़िक्र मत करें जोशीमठ के गुरूद्वारे में सारी व्यवस्था है’. डीएम साहिबा ने जिस गुरुद्वारे की बात कही दरसल वो गुरुद्वारा जोशीमठ में है जो आपदाग्रस्त क्षेत्र रैणी गाँव से करीब 12-15 किलोमीटर दूर है. इससे सरकार की ‘चुस्त-दुरुस्त’ व्यवस्था का अंदाजा साफ़ लगाया जा सकता है.

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