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सबसे बुज़ुर्ग पेंशनर ने जितने महीने सैलरी ली उससे कहीं ज्यादा पेंशन लिये

उत्तर प्रदेश। सबसे बुज़ुर्ग पेंशनर को पेंशन लेते पचास वर्ष पूरे हो गए, जबकि देश में औसत सेवानिवृत्ति की उम्र ही वर्ष के आसपास है। एक सम्माननीय जीवन जीने के लिये पेंशन बुज़ुर्गों का बहुत बड़ा सहारा है। उत्तर प्रदेश के एक शहर जालौन निवासी बाबूराम द्विवेदी की उम्र 105 वर्ष है, वे सबसे उम्रदराज़ पेंशनर हैं।

सबसे बुज़ुर्ग पेंशनर बाबूराम द्विवेदी दास्तान

जिला जालौन, ग्राम हरदोई निवासी बाबूराम द्विवेदी का जन्म 8 जनवरी 1915 को हुआ था। 5 अगस्त 1938 में तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत के दौरा राजस्व विभाग में नौकरी आरंभ की। 32 वर्ष व राजस्व विभाग में अमीन के पद पर रहे। वे 31 दिसंबर 1970 को सेवानिवृत्त हुए और एक जनवरी से उन्हें पेंशन मिलनी शुरू हुई। यह पेंशन अब तक अनवरत जारी है।

105 वर्षीय बाबूराम द्विवेदी के बेटे और बेटियाँ भी रिटायर हो चुके हैं एवं पेंशन पा रहे हैं। उनके सबसे बड़े बेटे शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त हुए रामनरेश 69 साल के हैं। दूसरे बेटे रमेश चंद्र हैं, की उम्र 67 साल है। रिटायर होने से पहले उन्होंने एडीओ पंचायत रहते हुए अपनी सेवाएँ दीं। उनकी छोटी बहु यानि रमेश चंद्र की धर्मपत्नी 66 साल प्रभा भी सेवानिवृत्त होकर पेंशन प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में सुपरवाइजर के पद पर रहते हुए अपनी सेवाएँ दी हैं।

बाबूराव द्विवेदी ने गुलाम और आज़ाद दोनों तरह के माहौल में काम किया है। जब उन्होंने काम शुरू किया था, तब भारत ब्रिटेन का उपनिवेश था और जब रिटायर हुए तब भारत एक स्वतंत्र, संप्रभु और लोकतांत्रिक देश बन चुका था। बाबूराम द्विवेदी अपने क्षेत्र के नामचीन व्यक्ति हैं, जिन्हें सभी का सम्मान हासिल है। अनेक विषयों पर लोग उनकी सलाह लेने आते रहते हैं। वह भी उन्हें अपने परिवार के साथ बिठाकर राय देते हैं। यह उनका सौभाग्य है कि पूरा परिवार उनके साथ अब भी रहता है।

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