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औरंगाबाद जिले का नाम बदलने की कवायद पर BJP, काँग्रेस और NCP ने क्या कहा?

एक बार फिर सरकारों द्वारा “नाम बदलो” अभियान में महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले का नाम बदलने की कवायद आरंभ हो चुकी है। इस बार यह कदम नाम बदलने के लिए मशहूर योगी आदित्यनाथ की सरकार ने नहीं बल्कि महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने उठाया है।

औरंगाबाद जिले का नाम बदलने की कवायद पर महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार के सहयोगी दलों की  बयानबाजी शुरू हो गयी है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और सरकार में राजस्व मंत्री हैं बालासाहेब थोरात। इन्होंने कहा है कि कांग्रेस औरंगाबाद शहर का नाम बदलने के कदम का विरोध करती है।

इंडिया टुडे टीवी से बात करते हुए बालासाहेब थोरात कहा कि महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी की गठबंधन सरकार है यह किसी एक ही पार्टी की सरकार नहीं है और इसलिए गठबंधन के तीनों सहयोगियों पार्टी की सरकार के प्रति जिम्मेदारी है. यह तीन दलों द्वारा गठित सरकार का गठन कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत किया गया था जिसमें जगहों के नाम बदलने का कोई कार्यक्रम तय नहीं था। थोरात ने यह भी कहा कि पार्टी ऐसी मान्यता है कि नाम बदलने से नागरिकों का विकास नहीं हो सकता है।  

दूसरी तरफ भाजपा नेताओं को मौका मिल गया बातें बनाने का कि महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार में दरार आ गयी है। इस पर बालासाहेब थोरात ने कहा कि यह भाजपा की अपनी सोच है लेकिन हम सभी मसलों पर पूरी चर्चा करने के बाद ही आगे बढ़ते है क्योंकि हमारा फोकस कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर अधिक है।

6 दिसंबर, 2020 को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने केंद्र से अनुरोध किया था कि औरंगाबाद हवाई अड्डे को छत्रपति संभाजी महाराज हवाई अड्डे का नाम दिया जाए। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर उद्धव ठाकरे ने सूचित किया था कि दोनों सदनों में सर्वसम्मती से यह फैसला लिया गया है।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा केंद्र सरकार को औरंगाबाद हवाई अड्डे का नाम बदलने का अनुरोध भेजने के मुद्दे पर थोरात ने कहा कि यह प्रस्ताव पहले से ही केंद्र सरकार के पास लंबित है और केंद्र सरकार ही इस पर फैसला लेगी।

औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर किये जाने संबंधी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के ट्वीट को लेकर भाजपा अपनी पीठ थपथपा रही है। भाजपा नेता राम कदम ने एक बयान में कहा –

बीजेपी और महाराष्ट्र के लोगों के दबाव के बाद मुख्यमंत्री ने अपने ट्वीट में औरंगाबाद का नाम संभाजीनगर करने पर मजबूर हुए। यह महाराष्ट्र के लोगों की एक बड़ी जीत है। हम शिवसेना से पूछना चाहते हैं कि क्या उनकी ओर से यह राजनीतिक नौटंकी है या फिर वे पूरे दिल से बदलाव करना चाहते हैं।

महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार जो NCP से ताल्लुक रखते हैं उन्होंने कहा कि NCP सुप्रीमो नागरिकों के विकास हेतु काम करने में विश्वास करते हैं। हर किसी को मांग रखने का अधिकार है।  हम एक साथ बैठेंगे और पूर्व में ही तय किये गए कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत समाधान निकालेंगे।

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